लेख
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कविताओं में उभरते सवाल–दर–सवाल : मोहनदास नैमिशराय
कविताओं में उभरते सवाल–दर–सवाल : मोहनदास नैमिशराय (बस बहुत हो चुका : ओम प्रकाश बाल्मीकि) हिन्दी में दलित साहित्य मराठी…
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राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशें और भारतीय भाषाओं का भविष्य
विवेक कुमार सिंह 21वीं सदी ज्ञान की…
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बहुमत की सरकार का सिनेमा
विनीत कुमार हिन्दू कॉलेज, दिल्ली से हिन्दी में एम.ए. करने वाले विनीत कुमार ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एफ एम चैनलों की भाषिक…
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अपार करुणा का कवि : आलोक धन्वा
संवेद पर आज कवि आलोक धन्वा के काव्य संग्रह ‘दुनिया रोज़ बनती है’ पर अवधेश कुमार का विचारात्मक लेख कुछ…
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‘दास-प्रथा’ और आस्कर पुरस्कार
रामजी तिवारी जब भी आस्कर पुरस्कारों की घोषणा की जाती है, अगले दिन भारत सहित, दुनिया भर…
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कुछ अनुत्तरित प्रश्नों पर विचार
हर्षबाला शर्मा (नेपथ्य राग – मीरा कान्त) ‘नेपथ्य राग’ मीरा कान्त का बहु चर्चित नाटक है. वर्तमान समय…
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बाजार का पौराणिक परिदृश्य
बाजार का पौराणिक परिदृश्य : हबीब तनवीर का ‘आगरा बाज़ार’ – अमितेश कुमार ‘आगरा बाजार’ आधुनिक भारतीय रंगमंच और भारतीय…
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स्वप्न और यथार्थ की आवाजाही
(‘शोकगीत’ : कुणाल सिंह) अरुणेश शुक्ल कुणाल सिंह की कहानी शोकगीत कई अर्थों में नब्बे के बाद आये भूमण्डलीकृत यथार्थ…
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स्मृतियों के पुल पर यथार्थ का आख्यान
(‘जानकी पुल’ : प्रभात रंजन) नीरज खरे हिन्दी कहानी में सक्रिय युवा पीढ़ी ने अपने समय को पहचानने–परखने की यथार्थ…
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