फणीश्वर नाथ रेणु
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रेणु : जीवन की धूसर छवियों का कहानीकार
रेणु हिन्दी की ग्रामीण पट्टी की आम जिन्दगी के कहानीकार हैं। उनके यहाँ ग्राम्य-जीवन अपनी पुरी सामाजिक जटिलता के…
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नित्यलीला
हिन्दी कहानी के इतिहास में – जो कि जाहिर सी बात है बमुश्किल सौ-सवा सौ सालों का ही है…
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आंचलिकता के घेरे से बाहर : कस्बे की लड़की
रेणु हिन्दी साहित्य के एक विलक्षण कथाकार हैं। इनकी कहानियों में एक ओर तो हैं वे पात्र जो वंचित…
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नित्य लीला का गाथाकार
सागर मेरा घरू शहर था : वहाँ रहते मुझे पन्द्रह साल से अधिक हो गये थे। मैंने सागर विश्विद्यालय…
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रेणु की कहानी ‘अभिनय’ : एक निकट पाठ
‘अभिनय ‘ रेणु की एक संक्षिप्त सी कहानी है। कहानी का रचना काल 1965 दर्ज है, यानि कि यह…
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यथार्थ और मनोविज्ञान का प्रतिक्रियात्मक रूपक (अतिथि सत्कार)
एक बीहड़ समय में बिखरे समय को कथावस्तु के रूप में स्वीकृति देना/ दिलाना लेखक के लिए सबसे कठिन…
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कलाकार के मनोविज्ञान का दार्शनिक पक्ष (ठेस)
मणीन्द्र नाथ ठाकुर कहानी और उपन्यासों को कैसे पढ़ा जाना चाहिए इस विषय को लेकर हिन्दी साहित्य में…
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समर्थ पात्रों की कहानी (अच्छे आदमी)
आकांक्षा पारे काशिव कहानीकार होना अलग बात है और कहानियों पर लिखना बिलकुल अलग। उस पर भी यदि…
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नेपथ्य का अभिनेता ही नेपथ्य का भारत है
मृत्युंजय कोई भी रचनाकार नेपथ्य का नायक होता है। रेणु को इसका अहसास था। स्थितियों ने उनके जीवन…
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रेणु और नागार्जुन
तारानन्द वियोगी रेणु की वह तस्वीर आपने जरूर देखी होगी, औराही हिंगना वाली, जिसमें वह खेत की गीली…
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